15 भारतीय व्याकरण, दर्शन, नाट्यशास्त्र एवं राजनीति के महान विद्वान
📜 भारतीय व्याकरण, दर्शन, नाट्यशास्त्र एवं राजनीति के महान विद्वान
1. BHARTRHARI (भर्तृहरि) – वाक्यपदीय एवं स्फोट सिद्धांत
कौन थे? भर्तृहरि (लगभग 5वीं शताब्दी ई.) – भारतीय व्याकरण परंपरा के सबसे महान दार्शनिक। इन्होंने वाक्यपदीय नामक ग्रंथ लिखा।
क्या है? यह भाषा दर्शन का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ है। तीन कांडों (भागों) में विभाजित:
| कांड | विषय | क्या कहता है? |
|---|---|---|
| ब्रह्मकांड | भाषा का मूल स्रोत | शब्द-ब्रह्म (स्फोट) ही सृष्टि का कारण |
| वाक्यकांड | वाक्य का स्वरूप | वाक्य ही अर्थ की इकाई है, शब्द नहीं |
| पदकांड | शब्दों का विश्लेषण | पद (शब्द) और उनके धातु-प्रत्यय |
मुख्य बात: भर्तृहरि कहते हैं – "वाक्य ही सत्य है, शब्द नहीं"। जैसे चित्र में रेखाएँ अलग-अलग दिखती हैं, पर अर्थ पूरे चित्र से आता है – वैसे ही वाक्य।
क्या है स्फोट? स्फोट = "स्फुट" (फूटना / प्रकट होना) – अर्थ का एक साथ प्रकट होना।
| अवधारणा | मतलब | उदाहरण |
|---|---|---|
| वर्ण (Phoneme) | ध्वनि के टुकड़े | ग, न, ता – अलग-अलग |
| ध्वनि (Sound) | कानों से सुनने वाली क्षणिक आवाज़ | "गंता" की ध्वनि क्रम से आती है |
| स्फोट (Meaningful unit) | अर्थ का एक साथ प्रकट होना | "गंता" सुनते ही अर्थ समझ आया |
स्फोट के तीन प्रकार (भर्तृहरि के अनुसार): वर्णस्फोट (अक्षर में अर्थ), पदस्फोट (शब्द में अर्थ), वाक्यस्फोट (वाक्य में अर्थ)। भर्तृहरि का निष्कर्ष: वाक्यस्फोट ही सबसे महत्वपूर्ण है।
"ग = अकेला अर्थ नहीं, ग+अ+ता मिले तो 'जाने वाला' – यही स्फोट"
2. PANINI (पाणिनि) – अष्टाध्यायी
कौन थे? पाणिनि (लगभग 4-5वीं शताब्दी ई.पू.) – संस्कृत व्याकरण के सबसे महान ऋषि। इन्हें व्याकरण का पिता भी कहते हैं (पश्चिम में भी)।
क्या है? अष्टाध्यायी = 8 + अध्याय। संस्कृत व्याकरण का सबसे पुराना और सबसे वैज्ञानिक ग्रंथ। इसमें लगभग 4000 सूत्र हैं।
| विशेषता | कैसे? | उदाहरण |
|---|---|---|
| अत्यंत संक्षिप्त | सूत्र बहुत छोटे | "1.1.1 वृद्धिरादैच्" – इतने में बड़ा नियम |
| तकनीकी शब्दावली | प्रतीकों का प्रयोग | इत्, घु, भ, च, टि – तकनीकी संकेत |
| अनुवृत्ति | एक नियम का दूसरे में लगातार | पिछले सूत्र के शब्द आगे चलते हैं |
| परिभाषा | पहले नियम के नियम | "परिभाषा" नामक सूत्र व्याकरण को नियंत्रित करते हैं |
पाणिनि की सबसे बड़ी उपलब्धि: उन्होंने संस्कृत भाषा के प्रत्येक शब्द को मूल धातु (root) + प्रत्यय (suffix) में बाँट दिया। जैसे: "गच्छति" = गम् (धातु) + शप् + तिप् (प्रत्यय)
3. PATANJALI (पतंजलि) – महाभाष्य एवं योग सूत्र
कौन थे? पतंजलि (लगभग 2री शताब्दी ई.पू.) – महान व्याकरणाचार्य और योग दार्शनिक। दो महान कृतियाँ: 1. महाभाष्य 2. योग सूत्र।
क्या है? यह पाणिनि के अष्टाध्यायी पर सबसे बड़ा भाष्य है। "महा + भाष्य" = बड़ा विवेचन। संवाद के रूप में लिखा (शिष्य पूछता है, आचार्य बताते हैं)।
योग सूत्र का मूल सूत्र (1.2): "योगः चित्त-वृत्ति-निरोधः" अर्थ: योग चित्त (मन) की वृत्तियों (तरंगों) का निरोध (रोक) है।
अष्टांग योग (8 अंग) – योग सूत्र 2.29:
| क्रम | अंग | मतलब |
|---|---|---|
| 1 | यम | सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह |
| 2 | नियम | शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान |
| 3 | आसन | स्थिर सुखमासन |
| 4 | प्राणायाम | श्वास पर नियंत्रण |
| 5 | प्रत्याहार | इंद्रियों को बाहर से हटाना |
| 6 | धारणा | एक बिंदु पर एकाग्रता |
| 7 | ध्यान | निरंतर धारा में एकाग्रता |
| 8 | समाधि | चित्त का पूर्ण विलय |
4. BHARATA (भरत) – नाट्यशास्त्र एवं रस सिद्धांत
कौन थे? भरत मुनि (लगभग 200 ई.पू. – 200 ई.) – नाट्यशास्त्र के रचयिता, भारतीय नाट्य कला के जनक।
सूत्र (नाट्यशास्त्र 6.31): "विभाव अनुभाव व्यभिचारी संयोगात् रस निष्पत्तिः"
| तत्व | मतलब | उदाहरण (श्रृंगार रस) |
|---|---|---|
| विभाव | कारण / उत्तेजक | चाँदनी रात, सुंदर दृश्य |
| अनुभाव | शारीरिक प्रतिक्रिया | मुस्कान, नेत्र कटाक्ष |
| व्यभिचारी संचारी | क्षणिक भाव | उत्सुकता, स्मृति, स्वप्न |
| स्थायी भाव | मूल भाव | रति (प्रेम) |
| रस (निष्पत्ति) | परिणामी आनंद | श्रृंगार रस |
8 मूल रस (बाद में 9वाँ – शांत रस):
| क्रम | रस | स्थायी भाव | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | श्रृंगार (प्रेम/सौंदर्य) | रति | राधा-कृष्ण मिलन |
| 2 | हास्य | हास | कॉमेडी दृश्य |
| 3 | करुण | शोक | करुण रोना |
| 4 | रौद्र | क्रोध | रावण का क्रोध |
| 5 | वीर | उत्साह | अर्जुन का युद्धोत्साह |
| 6 | भयानक | भय | रात में भूत दृश्य |
| 7 | बीभत्स | जुगुप्सा | मांस-रक्त दृश्य |
| 8 | अद्भुत | विस्मय | इंद्रजाल दृश्य |
| 9 | शांत (बाद में) | शम | बुद्ध मूर्ति |
और भी आसान: "श्री हरि करे रोज वीर भय भोज अद्भुत"
कौन थे? 10वीं शताब्दी के कश्मीरी विद्वान। भट्टनायक का त्रि-चरण मॉडल: अभिधा (कथन) → भावना (सामान्यीकरण) → स्वीकार-विधान (भोगीकरण)
5. YASKA (यास्क) – निरुक्त
कौन थे? यास्क (लगभग 7-5वीं शताब्दी ई.पू.) – निरुक्त के रचयिता। यह वेदांग (वेदों के छह अंगों में से एक) है – जिसका विषय व्युत्पत्ति (Etymology) है।
निरुक्त की परिभाषा: "निरुक्त" = निर् + उक्त = शब्दों का सही अर्थ/व्युत्पत्ति। चार प्रकार के शब्द: जाति, गुण, कर्म, यादृच्छा।
6. KAUTILYA (कौटिल्य) – अर्थशास्त्र एवं चाणक्य
कौन थे? कौटिल्य = चाणक्य = विष्णुगुप्त – मौर्य साम्राज्य के प्रधानमंत्री (चंद्रगुप्त मौर्य के गुरु)।
15 अध्याय (प्रकरण), लगभग 6000 श्लोक। प्रसिद्ध परिभाषा: "अर्थशास्त्रम् इत्य् अर्थस्य अर्थो भवति मनुष्याणाम्" – अर्थशास्त्र वह शास्त्र है जो मनुष्य के अर्थ (धन, पृथ्वी, राज्य) का संरक्षण करता है।
सप्तांग सिद्धांत (राज्य के 7 अंग): स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दण्ड, मित्र।
षड्गुण नीति (परराष्ट्र के 6 गुण): संधि (समझौता), विग्रह (युद्ध), यान (आक्रमण), आसन (तटस्थ), द्वैधीभाव (दो मोर्चे), समाश्रय (शरणागति)। ट्रिक: "स वि या आ द्वै समा"
विश्व का सबसे पुराना विश्वविद्यालय (लगभग 600 ई.पू.)। चाणक्य यहीं के शिक्षक थे, 60 से अधिक विषय, प्रवेश परीक्षा।
7. PURUSHARTHAS (पुरुषार्थ) – चार लक्ष्य
क्या है? पुरुषार्थ = पुरुष + अर्थ – मनुष्य के चार जीवन-लक्ष्य।
| क्रम | पुरुषार्थ | मतलब | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | धर्म | कर्तव्य, धार्मिकता, नैतिकता | सत्य बोलना, चोरी न करना |
| 2 | अर्थ | धन, संसाधन, राज्य | व्यापार, नौकरी, कृषि |
| 3 | काम | इच्छाएँ, कामना, रति | विवाह, संतान, कला, सौंदर्य |
| 4 | मोक्ष | जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति | आत्म-साक्षात्कार, ब्रह्मज्ञान |
आपसी संबंध (बहुत महत्वपूर्ण): अर्थ और काम – धर्म के बिना पशु समान। धर्म सही दिशा देता है। मोक्ष तीनों से ऊपर, लेकिन उनके बिना नहीं मिलता।
Bharthari → वाक्यपदीय + स्फोट = अर्थ एक साथ फूटता है | Panini → अष्टाध्यायी = 4000 सूत्र, संस्कृत का पूरा गणित | Patanjali → महाभाष्य + योग सूत्र (चित्त वृत्ति निरोध) | Bharata → नाट्यशास्त्र + 8 रस (श्रृंगार हास्य करुण रौद्र वीर भय बीभत्स अद्भुत) | Bhattanayaka → अभिधा → भावना → स्वीकार (रस भोग) | Yaska → निरुक्त = शब्दों की जड़ खोजो | Kautilya → अर्थशास्त्र + सप्तांग + षड्गुण + तक्षशिला | Purusharthas → धर्म अर्थ काम मोक्ष – चारों सीढ़ियाँ
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